बच्चो की दुनिया  कितने बहेतरीन रंगों से भरी रंगीन होती है | दुनिया और समाज  की परवाह  किए  बिना मस्त मौला बनके सब जगह ख़ुशी, प्रेम सबकुछ तो ढूंढ़  लेते  है ये बच्चे. क्युकि  वो  दुनिया मे सभ्यता, संस्कार, संस्कृति या इज्ज़त और आबरू  का  दिखावा नहीं करना जानते… और शायद उनकी आवश्यकता भी नहीं होती है |

बच्चो की सबसे बड़ी चिंता होती है… उनका प्यारा सा कोई खिलौना टूट जाना … उसी तरह  किसके  साथ सारा दिन खेलेंगे.. .?  बगीचे की सैर  करने ले जाओ तो उनको लगता है जेसे सारा विश्व उन्होंने देख लिया इतनी ख़ुशी उनके चेहरे पर ज़लकती है | संगीत के सुरों का या शब्दों का भले पता न चले  लेकिन धुनों  को सुनकर  अपने  अलग  अंदाज़  में नाच  उठाना  कितना अच्छा लगता है | A , B , C , D  या  क, ख, ग तो उनके लिए एक PUZZLE  GAME  होता है | पशु – पक्षिओ को उनके चाहिते नाम से पुकारते है तो बच्चो की आत्मीयता लगती  है | कुत्ते को कुकू, कबूतर को कबू और बिल्ली को म्याऊ कहेते कितना अपनापन नजर आता है |

बच्चे खुद ही रूठ जाते है.. और थोड़ी देर में जाने कुछ भी ना हुआ हो…एसे जल्दी से मान भी जाते है..उनके लिए कोई भी गैर नहीं है.. उनकी बातो से कोई गैर नहीं लगता… सबको देखने का नजरिया एक ही होता है |

नन्ही सी जान ये बच्चे छोटी छोटी बातो में भी अपनी जिद पूरी करते है तो उनको लगता है जैसे गोल्ड मेडल उन्होंने पा लिया… लेकिन उनकी ज़िद भी किसी को नुक्सान देह नहीं होती… बच्चो को हरदम एक ही ख्वाहिश रहेती है.. और वो है बड़े होने की… छोटी सी बात में भी वो बड़ा बनना चाहते है… मानो  उनका रात-दिन का बस एक ही स्वप्न हो…

सच में, बच्चो की दुनिया कितनी हसीं होती है.. चलो, अगर हम  अपना बचपन याद कर ले.. और अगर फिर से इसी बचपन में जेने के लिए बच्चो के साथ थोडा समय बिताये..और अपना बचपन वापस ले कर आए…|

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