चलते चलते…..

 

मेरे ये गीत याद रखना….

कभी अलविदा न कहेना…..

 

कभी प्यार में तो कभी तकरार में…

कभी इकरार तो कभी इनकार में…

हर बार कुछ कह जाते है ये बोल…

 

चलते चलते….

यु ही कोई मिल गया था….

चलते चलते कभी कोई मिल जाता है..

तो बस चलते चलते यु ही किसीसे प्यार हो जाता है..

फिर कभी चलते चलते फासले बढ़ जाते है..

तो कभी चलते चलते जीवन के रस्ते भी मिल जाते है…

 

चलते चलते यु ही रुक जाता हूँ में…

बैठे बैठे कही खो जाता हूँ में..

क्या यही प्यार है….

 

चलते चलते कुछ खोजने…कुछ पाने.. निकल जाता है ये मन…

तो बस यु ही कोई रही चलता जाता है

अपने दिल की दुनिया में.. ख्वाबो –ख़यालों में..कुछ

और जिंदगी के बीतें पलों में…

 

चला जाता हूँ किसीकी धून में..

धडकते दिल के तराने लिए…

 

युही चला चल रही….

कितनी हसीं है ये दुनिया…

भूल सारे जमले फिर भी फूलो के मेले…

कितनी हसीन है ये दुनिया…..

 

अच्छा तो हम चलते है…..

फिर कब मिलोगे…

जब तुम कहोगे….

 

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